2/07/2021 to 8/07/2021Activity report
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नदी, पहाड़ और घाटी से,
घिरी है मेरी इंफाल की माटी।
कृषि की पावन भूमि पर,
केंद्रीय विश्वविद्यालय की ज्योति है जगमगाती।
ज्ञान का सागर लहराए,
हिंदी का परचम फहराए।
गौरवमयी इतिहास की गाथा,
विश्वविद्यालय के हर कोने में गाए।
विद्यार्थी यहां आते हैं,
ज्ञान की गंगा में नहाते हैं।
कृषि की तकनीक सीखकर,
विकास की राह में आगे बढ़ जाते हैं।
हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है,
यह हमारी पहचान है।
संस्कृति का यह मान बढ़ाए,
यह हर भारतवासी का सम्मान है।
केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में,
हिंदी का गौरव गाते हैं।
एकता और अखंडता का,
हम सभी पाठ पढ़ाते हैं।
रचनाकार
डॉ सीमा मिश्रा